“नारी शक्ति..!”

March 16, 2012 "नारी शक्ति" पर कवितायेँ  7 comments

Ankita Jain

कभी हारती हूँ,  कभी गिरकर संभलती हूँ,

डरती भी हूँ, पर मुश्किलों से निकलती भी हूँ !

बस करो अब और न दो नाम कमजोरी का ,

मानो या न मानो पर तेरे इस जीवन की दायनी हूँ !!


कभी जो हो शक मेरी शक्ति का ,

तो पलट लेना इक बार पन्ने इतिहास के !

संग्हार किया है दुष्ट दानवो का ,

कभी मैं दुर्गा तो कभी काली भी हूँ !!

Ankita Jain

ना करना बात अब रुकने की मुझसे,

छूना है मुझे भी अब उस आसमा को !

शक हो इस पर भी तो पूछ लो अन्तरिक्ष से,

मिली थी उससे रूबरू मैं ऐसी कल्पना हूँ !!


है विनती आज मेरी बस इतनी सी,

ना मारो मुझे और ले लेने दो सांसे !

रोक दो ये अनर्थ वरना देखोगे ऐसा कल भी,

जब तुम लेना चाहो जीवन और मैं ना हूँ !!

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7 comments to “नारी शक्ति..!”

  • saroj says:

    aapki kavitaye kaafi achhi hoti h abhi naari shakti padha man ko jhajhorne waali h

    • saroj sharma says:

      aapki kavitaye sabhi achhi hoti h mujhe pasand h..

  • saroj sharma says:

    aap kafi achha likhti hai.

    • Ankita Jain says:

      Thanks :)

  • saroj sharma says:

    aap kafi achha likhati hai

  • anita says:

    very very nice poem

    • Ankita Jain says:

      thank you :)

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